मुरादाबाद। ई-पंजीकरण व्यवस्था का विरोध अब तेज होता जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार की प्रस्तावित ई-पंजीकरण व्यवस्था
और रजिस्ट्री प्रक्रिया को निजी कंपनी के माध्यम से संचालित किए जाने के निर्णय के विरोध में महानगर कांग्रेस कमेटी ने अधिवक्ताओं
और दस्तावेज लेखकों के आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन दिया है।
ई-पंजीकरण व्यवस्था का विरोध करते हुए कांग्रेस ने इस फैसले को रोजगार विरोधी बताया।
निजीकरण को बताया रोजगार पर सीधा प्रहार
महानगर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष ने कहा कि रजिस्ट्री का कार्य निजी कंपनी को सौंपने से अधिवक्ताओं, दस्तावेज लेखकों और इससे जुड़े हजारों लोगों के रोजगार पर सीधा असर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों का आंदोलन पूरी तरह न्यायसंगत और जनहित में है।
वर्षों पुरानी व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि निजीकरण की नीति केवल रोजगार के अवसर कम नहीं करेगी, बल्कि वर्षों से चली आ रही रजिस्ट्री व्यवस्था को भी कमजोर करेगी।
पार्टी ने कहा कि ई-पंजीकरण व्यवस्था का विरोध जनता और रोजगार दोनों के हित में किया जा रहा है।
कांग्रेस ने दिया बिना शर्त समर्थन
महानगर कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी के सभी पदाधिकारी और कार्यकर्ता इस आंदोलन के साथ मजबूती से खड़े हैं।
उन्होंने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस प्रदर्शन कर रहे अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों की आवाज शासन और प्रशासन तक पहुंचाने का काम करेगी।
सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग
कांग्रेस ने राज्य सरकार से रजिस्ट्री व्यवस्था के निजीकरण के प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की मांग की।
साथ ही अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों की समस्याओं का समाधान कर उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।
