मुरादाबाद। जनपद में शैक्षिक नवाचार के जरिए सरकारी विद्यालयों में शिक्षा को बेहतर और आकर्षक बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
विकास खंड बिलारी के प्राथमिक विद्यालय खरौवा में सहायक अध्यापक भगत सिंह और विद्यालय स्टाफ के शैक्षिक नवाचार से सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है।
विद्यालय में छात्र संख्या 87 से बढ़कर 154 हो गई है।
संगीत और नाट्य मंचन से बच्चों में बढ़ी रुचि
विद्यालय में बच्चों के लिए पढ़ाई को रोचक बनाने पर जोर दिया गया। इसके लिए अलग-अलग शैक्षिक नवाचार अपनाए गए।
प्रार्थना सभा को संगीत वाद्य यंत्रों के साथ रोचक बनाया गया।
पाठ्य-पुस्तकों में दी गई कहानियों को बच्चों ने वेशभूषा के साथ नाटक के रूप में प्रस्तुत किया।
कविताओं को भी संगीत के साथ प्रस्तुत कराया गया। बच्चों ने हारमोनियम, ढोलक, ढपली, मंजीरा
और गिटार जैसे वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल किया।
बच्चों की गतिविधियों में बढ़ी भागीदारी
इन गतिविधियों में बच्चों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई। इससे बच्चों में सीखने के प्रति उत्साह बढ़ा।
बच्चे नाट्य मंचन, कविता प्रस्तुति और अन्य रचनात्मक गतिविधियों में खुशी से शामिल होने लगे।
विद्यालय उनके लिए पढ़ाई के साथ सीखने और अपनी प्रतिभा दिखाने का स्थान बन गया।
87 से बढ़कर 154 हुई छात्र संख्या
इस शैक्षिक नवाचार का असर विद्यालय की छात्र संख्या पर भी दिखाई दिया।
सत्र 2024-25 में विद्यालय में छात्र संख्या 87 थी। अब यह संख्या बढ़कर 154 हो गई है।
इस तरह विद्यालय में 67 विद्यार्थियों की वृद्धि हुई है। विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति और विद्यालय में ठहराव में भी सकारात्मक बदलाव की बात सामने आई है।
अभिभावकों से लगातार किया गया संवाद
विद्यालय में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए प्रधानाध्यापक और स्टाफ ने अभिभावकों से लगातार संपर्क किया।
ग्राम प्रधान और गांव के संभ्रांत लोगों से भी संवाद किया गया। बच्चों को विद्यालय से जोड़ने के प्रयास किए गए।
इसके साथ ही शैक्षिक नवाचार के जरिए विद्यालय के वातावरण को बच्चों के लिए अधिक आनंददायक और रचनात्मक बनाया गया।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को मिल रहा प्रोत्साहन
जिलाधिकारी डॉ. राजेन्द्र पैंसिया के नेतृत्व में जनपद में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और शैक्षिक नवाचार को बढ़ावा देने के प्रयास किए जा रहे हैं।
जिला प्रशासन का उद्देश्य सरकारी विद्यालयों में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण, आनंददायक और अनुभवात्मक शिक्षा उपलब्ध कराना है।
प्राथमिक विद्यालय खरौवा में किए गए शैक्षिक नवाचार को इसी दिशा में एक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
