मुरादाबाद। ईद-ए-ग़दीर के मुबारक मौके पर मुरादाबाद की शिया जामा मस्जिद में एक भव्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया।
ईद-ए-ग़दीर कार्यक्रम में शिया शहर इमाम मौलाना अली हैदर नूरी ने ग़दीर-ए-खुम की ऐतिहासिक घटना का महत्व बताते हुए हजरत अली (अ.) की शिक्षाओं को अपनाने का संदेश दिया।
ग़दीर-ए-खुम की घटना पर डाला प्रकाश
मौलाना अली हैदर नूरी ने अपने संबोधन में कहा कि हज से वापसी के दौरान ग़दीर-ए-खुम नामक स्थान पर अल्लाह के आखिरी नबी हजरत मोहम्मद मुस्तफा (स.) ने हजारों लोगों के सामने हजरत अली (अ.) का हाथ उठाकर उन्हें अपना उत्तराधिकारी और मौला घोषित किया था।
उन्होंने कहा कि यही ऐतिहासिक घटना आज ईद-ए-ग़दीर के रूप में मनाई जाती है।
हजरत अली के संदेश को अपनाने की अपील
मौलाना अली हैदर नूरी ने कहा कि हजरत अली (अ.) का जीवन न्याय, ज्ञान, मानवता और भाईचारे का प्रतीक है।
उन्होंने लोगों से हजरत अली के आदर्शों को अपने जीवन में उतारने और समाज में प्रेम, सद्भाव और इंसानियत को बढ़ावा देने की अपील की।
मनकबत और कलाम से सराबोर हुआ माहौल
ईद-ए-ग़दीर कार्यक्रम के दौरान स्थानीय शायरों ने हजरत अली (अ.) की शान में अपने कलाम और मनकबत पेश किए।
शायरों की प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को अकीदत और मोहब्बत से भर दिया।
उपस्थित लोगों ने भरपूर दाद देकर उनका उत्साहवर्धन किया।
नज़र-ओ-नियाज़ में शामिल हुए अकीदतमंद
कार्यक्रम के समापन पर नज़र व नियाज़ का आयोजन किया गया।
बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने इसमें शिरकत कर तबर्रुक हासिल किया।
ईद-ए-ग़दीर के इस आयोजन में शिया समुदाय के बुजुर्गों,
युवाओं और बच्चों सहित बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी रही।
भाईचारे और धार्मिक उत्साह के साथ संपन्न हुआ कार्यक्रम
शिया जामा मस्जिद में आयोजित ईद-ए-ग़दीर कार्यक्रम पूरे धार्मिक उत्साह, अनुशासन और भाईचारे के वातावरण में संपन्न हुआ।
वक्ताओं ने ग़दीर-ए-खुम के पैगाम को आम जनमानस तक पहुंचाने और समाज में एकता व सद्भाव को मजबूत करने पर जोर दिया।
