14 मोहर्रम का कदीमी जुलूस संभल जनपद के कस्बा सिरसी सादात में बुधवार को अकीदत और गमगीन माहौल के बीच निकाला गया।
इदारा-ए-सिपाहे अब्बास सोशल वेलफेयर ट्रस्ट रजिस्टर्ड की ओर से लगातार 28वें वर्ष आयोजित किए गए इस जुलूस में ज़ुल्जनाह, ताबूत और आलम शामिल रहे।
बड़ी संख्या में अज़ादार नंगे पांव जुलूस में शामिल हुए और ‘या हुसैन’ व ‘लब्बैक या हुसैन’ की सदाओं से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
सीना ज़नी और नोहाखानी के साथ मनाई शहादत की याद
जुलूस शहर के पारंपरिक मार्गों से होकर बड़ा इमामबाड़ा कला खरबी तक पहुंचा।
जुलूस में शामिल मातमी दस्तों ने सीना ज़नी और नोहाखानी कर हजरत इमाम हुसैन
और शोहदा-ए-कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
काले लिबास में शामिल अज़ादार गम में डूबे नजर आए।
आग और जंजीर का मातम भी किया गया
इदारा-ए-सिपाहे अब्बास सोशल वेलफेयर ट्रस्ट और शिया समुदाय के लोगों ने आग और जंजीर का मातम भी किया।
अज़ादारों ने बताया कि 14 मोहर्रम का कदीमी जुलूस कर्बला के शहीदों की याद में निकाला जाता है
और यह इंसाफ, सब्र और कुर्बानी का संदेश देता है।
कर्बला की कुर्बानी को किया याद
शिया समुदाय के लोगों ने कहा कि नबी-ए-करीम हजरत मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने यज़ीद के अत्याचार के खिलाफ आवाज़ उठाई
और कर्बला के मैदान में शहादत दी।
उनकी कुर्बानी को याद करते हुए हर वर्ष 14 मोहर्रम का कदीमी जुलूस निकाला जाता है।
पुलिस और प्रशासन रहा पूरी तरह मुस्तैद
जुलूस के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए। बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी तैनात रहे।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जगह-जगह पेयजल और चिकित्सा शिविर भी लगाए गए।
समुदाय के बुजुर्गों ने युवाओं से इमाम हुसैन की शिक्षा पर चलने और इंसानियत व सच्चाई का साथ देने की अपील की।
