अदालत ने मस्जिद में 20 लोगों की नमाज़ सीमा लगाने के प्रशासन के आदेश को रद्द कर दिया है।
कोर्ट ने इस मामले में प्रशासन पर नाराजगी जताई।
अदालत ने साफ कहा कि नमाज़ उसी तरह होगी जैसे पहले से होती आई है।
कोर्ट ने कहा कि पुलिस या प्रशासन को लोगों की इबादत में दखल देने का अधिकार नहीं है।
नमाज़ पर कोर्ट की स्पष्ट टिप्पणी
अदालत ने कहा कि 20 लोगों की नमाज़ सीमा तय करना धार्मिक अधिकारों में हस्तक्षेप है।
कोर्ट ने कहा कि नमाज़ पढ़ना लोगों का धार्मिक अधिकार है।
इसे कानून-व्यवस्था के नाम पर सीमित नहीं किया जा सकता।
बेंच ने कहा कि नमाज़ उसी तरीके से अदा होगी जैसे पहले से होती रही है।
डीएम और एसपी को कोर्ट की चेतावनी
जस्टिस अतुल श्रीधरन और सिद्धार्थ नंदन की बेंच ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी।
कोर्ट ने संभल के डीएम और एसपी से कहा कि यदि वे जिले में कानून-व्यवस्था संभाल नहीं सकते, तो पद छोड़ दें।
अदालत ने कहा कि प्रशासन की जिम्मेदारी शांति बनाए रखना है, धार्मिक अधिकारों को रोकना नहीं।
मुनाजिर खान की याचिका पर हुई सुनवाई
यह मामला मुनाजिर खान की याचिका पर अदालत पहुंचा था।याचिका में कहा गया था कि प्रशासन ने 20 लोगों की नमाज़ सीमा तय कर दी है।
याचिकाकर्ता ने इस आदेश को अदालत में चुनौती दी थी। कोर्ट ने सुनवाई के बाद इस सीमा को रद्द कर दिया।
रमज़ान में ईद से पहले अहम फैसला
यह आदेश 14 मार्च 2026 को जारी किया गया।रमज़ान और ईद के मौके से पहले इसे एक महत्वपूर्ण न्यायिक फैसला माना जा रहा हैc
कोर्ट ने साफ कहा कि मस्जिद में 20 लोगों की नमाज़ सीमा लगाना उचित नहीं है।
प्रशासन को लोगों के धार्मिक अधिकारों का सम्मान करना चाहिए। फिलहाल मस्जिद में नमाज़ सीमा रद्द
