Petrol Export Tax 2026: पेट्रोल के निर्यात पर टैक्स खत्म, डीजल और ATF पर बढ़ा शुल्क
केंद्र सरकार ने Petrol Export Tax 2026 को लेकर बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाला स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) पूरी तरह समाप्त कर दिया है।
वहीं, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर शुल्क बढ़ा दिया गया है।
वित्त मंत्रालय की ओर से 31 अक्टूबर 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार, नई दरें लागू कर दी गई हैं।
सरकार के इस फैसले से पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर असर पड़ेगा। पेट्रोल निर्यातकों को राहत मिलेगी।
वहीं, डीजल और विमान ईंधन के निर्यात पर अतिरिक्त शुल्क देना होगा।
Petrol Export Tax 2026: तीनों ईंधनों पर कितना बदला टैक्स?
सरकार ने पेट्रोल, डीजल और ATF के निर्यात शुल्क में अलग-अलग बदलाव किए हैं। नई दरें इस प्रकार हैं।
ईंधन| पुराना शुल्क| नया शुल्क
पेट्रोल| ₹2.50 प्रति लीटर| शून्य
डीजल| ₹8.50 प्रति लीटर| ₹11.50 प्रति लीटर
ATF| ₹10.50 प्रति लीटर| ₹11 प्रति लीटर
नई व्यवस्था के तहत पेट्रोल पर ₹2.50 प्रति लीटर का शुल्क समाप्त कर दिया गया है। डीजल पर ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है।
वहीं, ATF पर 50 पैसे प्रति लीटर शुल्क बढ़ाया गया है।
Petrol Export Tax खत्म करने के पीछे क्या है वजह?
पेट्रोल के निर्यात पर शुल्क हटाने का फैसला अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों से जुड़ा माना जा रहा है।
पेट्रोलियम कंपनियां कच्चे तेल को रिफाइन करके पेट्रोल, डीजल और अन्य उत्पाद तैयार करती हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी कीमतें अलग-अलग होती हैं।
इससे कंपनियों के रिफाइनिंग मार्जिन और मुनाफे पर असर पड़ता है।
पेट्रोल पर एक्सपोर्ट टैक्स शून्य होने से निर्यातकों की लागत कम होगी। इससे रिफाइनिंग कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कारोबार करने में राहत मिल सकती है।
Diesel Export Duty क्यों बढ़ाई गई?
डीजल भारतीय अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण ईंधन है। इसका इस्तेमाल परिवहन, कृषि, उद्योग और माल ढुलाई में बड़े पैमाने पर होता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में डीजल की कीमतें अधिक होने पर रिफाइनिंग कंपनियां घरेलू बाजार के बजाय निर्यात को प्राथमिकता दे सकती हैं।
इससे देश में डीजल की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका रहती है।
घरेलू आपूर्ति बनाए रखने के लिए सरकार ने डीजल एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर ₹11.50 प्रति लीटर कर दी है।
इससे डीजल के निर्यात पर अतिरिक्त लागत आएगी। सरकार का उद्देश्य घरेलू जरूरतों और निर्यात के बीच संतुलन बनाए रखना है।
ATF Export Tax भी बढ़ाया गया
ATF यानी एविएशन टर्बाइन फ्यूल का इस्तेमाल हवाई जहाजों में किया जाता है।
विमानन क्षेत्र के लिए इसकी नियमित उपलब्धता जरूरी है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में विमान ईंधन की कीमतों में उतार-चढ़ाव होता रहता है।
ऐसे में घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखना भी जरूरी है।
सरकार ने ATF पर निर्यात शुल्क ₹10.50 से बढ़ाकर ₹11 प्रति लीटर कर दिया है।
यानी इसमें 50 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार से कैसे जुड़ा है यह फैसला?
पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क का सीधा संबंध अंतरराष्ट्रीय बाजार की कीमतों से होता है।
सरकार ने 27 मार्च 2026 को पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी अनिश्चितताओं के बीच डीजल और ATF के निर्यात पर शुल्क लगाने की व्यवस्था शुरू की थी।
इसके पीछे दो प्रमुख उद्देश्य हैं।
- घरेलू आपूर्ति बनाए रखना: देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना।
- अतिरिक्त मुनाफे पर नियंत्रण: अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कीमतों के अंतर से होने वाले असाधारण लाभ को नियंत्रित करना।
सरकार हर 15 दिन में इन शुल्कों की समीक्षा करती है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों के अनुसार दरों में बदलाव किया जा सकता है।
क्या पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ेंगी?
सरकार के Petrol Export Tax 2026 फैसले का सीधा असर पेट्रोल पंपों पर मिलने वाले ईंधन की कीमतों पर नहीं माना जाना चाहिए।
यह बदलाव पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात शुल्क से संबंधित है।
घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर लगने वाले मौजूदा उत्पाद शुल्क में इस अधिसूचना के तहत बदलाव नहीं किया गया है।
इसलिए केवल निर्यात शुल्क बढ़ने या घटने से पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतें सीधे नहीं बढ़ती हैं।
हालांकि, कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें, रुपये की विनिमय दर और रिफाइनिंग लागत जैसे कई कारक घरेलू ईंधन की कीमतों को प्रभावित कर सकते हैं।
हर 15 दिन में क्यों होती है एक्सपोर्ट टैक्स की समीक्षा?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें लगातार बदलती रहती हैं।
ऐसे में सरकार हर 15 दिन में निर्यात शुल्क की समीक्षा करती है।
इससे बाजार की मौजूदा परिस्थितियों के अनुसार शुल्क में बदलाव किया जा सकता है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य निर्यात और घरेलू आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखना है।
पेट्रोल, डीजल और ATF को लेकर सरकार की अलग-अलग रणनीति
31 अक्टूबर 2026 के फैसले में सरकार ने तीनों ईंधनों के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित किया है।
पेट्रोल पर निर्यात शुल्क समाप्त किया गया है। वहीं, डीजल और ATF पर शुल्क बढ़ाया गया है।
इसका असर निर्यात करने वाली रिफाइनिंग कंपनियों पर पड़ेगा। हालांकि,
आम उपभोक्ताओं के लिए घरेलू पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तत्काल बदलाव का कोई सीधा संकेत इस फैसले से नहीं मिलता है।
स्रोत: वित्त मंत्रालय की अधिसूचना, पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) तथा संबंधित सरकारी जानकारी।
