मुरादाबाद: ठाकुरद्वारा तेंदुआ रेस्क्यू अभियान को और प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन ने नई तकनीक का सहारा लिया है।
ठाकुरद्वारा तेंदुआ रेस्क्यू अभियान के तहत प्राथमिक चरण में पांच वाइल्डलाइफ रिपेलेंट डिवाइस लगाए जाएंगे।
इन उपकरणों का उद्देश्य तेंदुओं की सुरक्षित निगरानी करना और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को कम करना है।
इन गांवों में लगाए जाएंगे वाइल्डलाइफ रिपेलेंट डिवाइस
जिला प्रशासन के अनुसार ग्राम बलिया में दो, मलकपुर सेमली में एक, वीरूवाला में एक और काशीराम कॉलोनी, ठाकुरद्वारा में एक वाइल्डलाइफ रिपेलेंट डिवाइस स्थापित किया जाएगा।
यह पहल ठाकुरद्वारा तेंदुआ रेस्क्यू अभियान को तकनीकी मजबूती देने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
कलेक्ट्रेट में हुआ डिवाइस का ट्रायल
कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया, मुख्य विकास अधिकारी सुश्री मृणाली अविनाश जोशी,
अपर जिलाधिकारी नगर अंकुर श्रीवास्तव और अपर जिलाधिकारी प्रशासन श्रीमती संगीता गौतम की मौजूदगी में उपकरण का ट्रायल किया गया।
आपूर्तिकर्ता ने अधिकारियों को डिवाइस की कार्यप्रणाली और इसकी तकनीकी विशेषताओं की जानकारी दी।
थर्मल मोशन सेंसर से होगी तेंदुए की पहचान
यह वाइल्डलाइफ रिपेलेंट डिवाइस थर्मल मोशन सेंसर तकनीक से लैस है। जैसे ही कोई वन्यजीव निर्धारित क्षेत्र में प्रवेश करेगा, सेंसर उसके शरीर की ऊष्मा को पहचान लेगा।
इसके तुरंत बाद डिवाइस तेज बीप सायरन और फ्लैश लाइट सक्रिय कर देगा।
मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने में मिलेगी मदद
तेज आवाज और चमकती रोशनी से तेंदुए और अन्य वन्यजीव उस क्षेत्र से दूर रहेंगे।
प्रशासन का मानना है कि ठाकुरद्वारा तेंदुआ रेस्क्यू अभियान के तहत यह तकनीक ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाने और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
प्रशासन की बड़ी पहल
जिला प्रशासन का कहना है कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से ठाकुरद्वारा तेंदुआ रेस्क्यू अभियान को और अधिक सफल बनाया जाएगा।
साथ ही ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भविष्य में भी ऐसे तकनीकी उपायों को बढ़ावा दिया जाएगा।
