जनपद में नवाचारी शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देने और परिषदीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से शिक्षकों के साथ संवाद सत्र आयोजित किया गया।
विकास भवन सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी सुश्री मृणाली अविनाश जोशी ने की।
इस दौरान उन्होंने शिक्षकों के नवाचारी प्रयासों की सराहना की और अपने अनुभव साझा करने पर जोर दिया।
शिक्षकों ने वन-पेजर के माध्यम से प्रस्तुत किए नवाचार
संवाद सत्र में जनपद के सभी विकास खण्डों से चयनित शिक्षक शामिल हुए। शिक्षकों ने अपने विद्यालयों में अपनाई जा रही प्रभावी शिक्षण पद्धतियों की जानकारी दी।
उन्होंने शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम) के उपयोग और विद्यार्थियों के शैक्षिक स्तर में सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों को वन-पेजर के माध्यम से प्रस्तुत किया।
इसके साथ ही शिक्षकों ने बताया कि गतिविधि आधारित और रचनात्मक शिक्षण विधियों से बच्चों की कक्षा में सहभागिता बढ़ रही है।
इससे उनकी सीखने की प्रक्रिया भी बेहतर हो रही है।
CDO ने शिक्षकों के प्रयासों की सराहना की
मुख्य विकास अधिकारी सुश्री मृणाली अविनाश जोशी ने शिक्षकों से विस्तार से संवाद किया।
उन्होंने विद्यालयों में किए जा रहे नवाचारों और शिक्षण कार्य के दौरान आने वाली चुनौतियों पर चर्चा की।
उन्होंने शिक्षकों के सुझावों को गंभीरता से सुना। साथ ही उनके सकारात्मक प्रयासों की सराहना की।
CDO ने कहा कि विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता और जरूरतों के अनुसार शिक्षण विधियां अपनाना जरूरी है।
शिक्षण प्रक्रिया सरल, रोचक और सहभागितापूर्ण होनी चाहिए।
इसके अलावा शिक्षकों को एक-दूसरे के अच्छे प्रयोगों और अनुभवों से भी सीखना चाहिए।
स्व-अध्ययन और टीएलएम के उपयोग पर जोर
संवाद सत्र में विद्यार्थियों के सर्वांगीण शैक्षिक विकास पर विशेष चर्चा हुई।
बच्चों में स्वतंत्र रूप से कार्य करने की क्षमता विकसित करने पर जोर दिया गया।
इसके अलावा स्व-अध्ययन को प्रोत्साहित करने और नियमित पुनरावृत्ति के माध्यम से पढ़ाई को मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई।
प्रत्येक कालांश के लिए सुनियोजित शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम) के उपयोग को महत्वपूर्ण बताया गया।
वहीं, विद्यार्थियों को स्वतंत्र अभ्यास के अवसर देने के लिए रीड अलॉन्ग ऐप के इस्तेमाल पर भी विचार-विमर्श किया गया।
अभिभावकों की सहभागिता से बेहतर होगी शिक्षा व्यवस्था
बैठक में शिक्षण प्रक्रिया में अभिभावकों की सक्रिय सहभागिता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
इसके साथ ही बच्चों को सकारात्मक प्रोत्साहन देकर उनका आत्मविश्वास बढ़ाने की आवश्यकता बताई गई।
मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि नवाचारी शिक्षण पद्धतियों के प्रभावी प्रयोगों को अन्य विद्यालयों तक भी पहुंचाया जाना चाहिए।
इससे सभी विद्यालयों को एक-दूसरे के अच्छे प्रयासों से सीखने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने जनपद में गुणवत्तापूर्ण और परिणामोन्मुखी शिक्षण व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर जोर दिया।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी सहित शिक्षक रहे मौजूद
इस संवाद सत्र में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी श्री अमित सिंह सहित जनपद के विभिन्न विकास खण्डों से चयनित शिक्षक उपस्थित रहे।
