मुरादाबाद का पीतल उद्योग योगी सरकार की योजनाओं से नई पहचान बना रहा है। ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) योजना ने स्थानीय शिल्पकारों को बड़ा बाजार उपलब्ध कराया है।
इसका फायदा अब मुरादाबाद के कारीगरों को मिल रहा है। दिवाली के अवसर पर पीतल के दीये, पूजा की घंटियां और मीनाकारी से सजे उत्पाद लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।
मुरादाबाद के दौलतबाग निवासी 45 वर्षीय शिल्पकार अशरफ इसका उदाहरण हैं। वह पिछले 15 वर्षों से पीतल की कारीगरी कर रहे हैं।
पहले उन्हें अपने उत्पादों के लिए सीमित बाजार मिलता था। हालांकि, सरकारी योजनाओं से जुड़ने के बाद उनके कारोबार को नई दिशा मिली है।
ओडीओपी योजना से मुरादाबाद के पीतल शिल्प को मिली पहचान
वर्ष 2018 में शुरू हुई ओडीओपी योजना ने अशरफ के कारोबार को नई पहचान दी।
इसके माध्यम से उन्हें बड़े मेलों और प्रदर्शनियों में अपने उत्पाद बेचने का अवसर मिला।
इसके अलावा, उन्हें निःशुल्क स्टॉल और अन्य सुविधाएं भी मिलीं। लखनऊ से उन्हें 100 विशेष पूजा घंटियों का थोक ऑर्डर मिला।
वहीं, उनके मीनाकारी उत्पाद गुजरात के ओडीओपी स्टोर तक पहुंचे।
अब उन्हें देश के अलग-अलग हिस्सों से 50, 100 और 150 पीस तक के ऑर्डर मिल रहे हैं।
इससे मुरादाबाद का पीतल उद्योग नए बाजारों तक पहुंच रहा है।
दिवाली पर पीतल के दीयों और पूजा सामग्री की बढ़ी मांग
दिवाली के त्योहार को देखते हुए पीतल के उत्पादों की मांग बढ़ गई है। मेरठ में आयोजित माटी कला मेले में मुरादाबाद के हस्तशिल्प उत्पाद लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।
यहां अलग-अलग कीमतों पर उत्पाद उपलब्ध हैं।
- छोटे पीतल के दीये: 150 और 250 रुपये
- कलात्मक दीये: 450 रुपये
- पूजा घंटियां: 200 रुपये
- नक्काशीदार थालियां और कलाकृतियां: 900 रुपये
इन उत्पादों पर पारंपरिक मीनाकारी और आकर्षक नक्काशी की गई है। यही वजह है कि ग्राहक इन्हें पसंद कर रहे हैं।
भट्टी से तैयार होती हैं पीतल की आकर्षक कलाकृतियां
मुरादाबाद के पीतल उत्पादों को तैयार करने में कई चरणों से गुजरना पड़ता है। सबसे पहले भट्टी में पीतल को पिघलाया जाता है।
इसके बाद दीयों, थालियों और कटोरों की ढलाई होती है।
फिर इन पर उभारदार नक्काशी की जाती है। इसके बाद कारीगर हाथों से मीनाकारी के रंग भरते हैं।
अंत में छिलाई और पॉलिशिंग की जाती है।
इस पूरी प्रक्रिया में कारीगरों की मेहनत और हुनर शामिल होता है। इसी कारण मुरादाबाद के पीतल उत्पादों की अलग पहचान है।
माटी कला मेले में 25 स्टॉलों के बीच मिला विशेष मंच
उत्तर प्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड की ओर से 1 से 7 नवंबर तक सात दिवसीय माटी कला मेले का आयोजन किया जा रहा है।
मेले में लगभग 24 से 25 स्टॉल लगाए गए हैं। इनमें मुरादाबाद के पीतल शिल्प को भी विशेष स्थान मिला है।
सरकार की ओर से कारीगरों को निःशुल्क स्टॉल उपलब्ध कराए गए हैं। इससे उन्हें सीधे ग्राहकों तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है।
एक स्टेशन एक उत्पाद योजना से रेलवे स्टेशन पर मिला बाजार
केंद्र और प्रदेश सरकार की एक स्टेशन एक उत्पाद योजना ने भी मुरादाबाद के शिल्पकारों को लाभ पहुंचाया है।
मुरादाबाद रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर पांच लाख रुपये की लागत से आधुनिक कियोस्क स्थापित किया गया है।
इस पर सबसे पहले स्टॉल लगाने का अवसर शिल्पकार अशरफ को मिला था।
इस प्लेटफॉर्म पर स्टॉल लगाने के लिए मात्र 2,000 रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया है।
योजना के प्रति कारीगरों का उत्साह लगातार बढ़ रहा है। शुरुआत में 10 कारीगरों ने आवेदन किया था।
अब 700 से अधिक शिल्पकार स्टॉल पाने के लिए आवेदन कर चुके हैं।
15 कारीगरों को मिल रहा रोजगार, सालाना तीन लाख तक कमाई
अशरफ के कारोबार से 10 से 15 अन्य स्थानीय कारीगरों को भी रोजगार मिल रहा है।
ये कारीगर ढलाई, छिलाई, एमरी, पॉलिश और मीनाकारी का काम करते हैं।
अशरफ के अनुसार, वह एक प्रदर्शनी में लगभग 50 हजार रुपये का माल लेकर जाते हैं।
इससे उन्हें 25 हजार से 35 हजार रुपये तक शुद्ध मुनाफा होता है।
वर्तमान में उनकी सालाना आमदनी लगभग 2.5 लाख से 3 लाख रुपये तक पहुंच गई है।
220 घंटे के प्रशिक्षण से निखरा हुनर
अशरफ ने जिला उद्योग केंद्र के सहयोग से पीतल नगरी केंद्र पर 220 घंटे का एमएसएमई प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
इस प्रशिक्षण में उन्हें उत्पादों की गुणवत्ता, आधुनिक फिनिशिंग और राष्ट्रीय एवं राज्य पुरस्कारों के मानकों की जानकारी मिली।
अब वह अपने काम को और आगे बढ़ाना चाहते हैं। इसके लिए वह पीएम विश्वकर्मा योजना के माध्यम से कारोबार का विस्तार करने की तैयारी में हैं।
कारीगर अशरफ ने सरकार के प्रयासों को बताया फायदेमंद
शिल्पकार अशरफ का कहना है कि माटी कला मेले में ग्राहकों की अच्छी भीड़ पहुंच रही है।
लोग पीतल के दीयों और मीनाकारी उत्पादों को खूब पसंद कर रहे हैं।
उनके अनुसार, दिवाली के लिए ग्राहक उत्साह के साथ खरीदारी कर रहे हैं।
इससे कारीगरों की बिक्री और कमाई दोनों बढ़ रही हैं।
योगी सरकार की योजनाओं और सरकारी मंचों से मुरादाबाद के पारंपरिक पीतल शिल्प को नई पहचान मिल रही है।
