युवाओं में बढ़ती नशे की लत समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। नशे की आदत किशोरों और युवाओं के भविष्य को प्रभावित कर रही है।
इससे परिवारों का सुख-चैन भी छिन रहा है। नशे के कारण लड़ाई-झगड़े, दुर्घटनाएं और अपराध जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
ऐसे में नशा मुक्ति जागरूकता और सामाजिक सहयोग की जरूरत लगातार बढ़ रही है।
आजकल युवाओं में अलग-अलग प्रकार के नशीले पदार्थों के सेवन का प्रचलन बढ़ रहा है।
इनमें भांग, चरस और गांजा जैसे पदार्थ शामिल हैं। कुछ लोग नशीली दवाओं का सेवन इंजेक्शन के माध्यम से भी करते हैं।
यह आदत स्वास्थ्य और जीवन दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।
नशीले पदार्थों की आसान उपलब्धता चिंता का विषय
नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार और उनकी आसान उपलब्धता के कारण युवा इसकी चपेट में आ रहे हैं।
गलत संगत भी नशे की लत बढ़ने का एक बड़ा कारण बन सकती है।
किशोरावस्था में इस तरह की आदतें भविष्य को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
युवाओं में बढ़ती नशे की लत को रोकने के लिए परिवार,
शिक्षण संस्थानों और समाज को मिलकर प्रयास करने होंगे।
युवाओं को समय रहते सही दिशा दिखाना जरूरी है।
परिवार और समाज की जिम्मेदारी भी अहम
क्षेत्रीय मद्यनिषेध एवं समाजोत्थान अधिकारी श्री अंकुर पाण्डेय ने बताया कि युवाओं में बढ़ती नशे की लत के लिए कहीं न कहीं परिवार और समाज भी जिम्मेदार हैं।
उन्होंने कहा कि पहले आसपास के लोग और गांव के बुजुर्ग किशोरों व युवाओं को गलत गतिविधियों में शामिल होते देखते थे,
तो उन्हें रोकते और समझाते थे।
यदि किसी बच्चे में नशे की आदत के संकेत मिलते थे, तो परिवार और समाज के लोग उसे सही रास्ते पर लाने का प्रयास करते थे।
लेकिन अब कई लोग दूसरों के बच्चों की समस्याओं को अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते।
वे सोचते हैं कि दूसरे का बच्चा नशा कर रहा है, उनका बच्चा नहीं।
जबकि नशे की लत का असर आसपास के दूसरे युवाओं पर भी पड़ सकता है।
एक युवा की नशे की आदत दूसरे युवाओं को भी प्रभावित कर सकती है।
इसलिए नशा मुक्ति जागरूकता अभियान में समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है।
नशे से परिवार की आर्थिक स्थिति पर पड़ता है असर
नशे की लत का असर केवल सेवन करने वाले व्यक्ति पर नहीं पड़ता। इससे पूरा परिवार प्रभावित होता है।
इस कारण घरों में विवाद और कलह की स्थिति पैदा हो सकती है।
महिलाओं और बच्चों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ता है। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने लगती है।
बच्चों की पढ़ाई और भविष्य पर भी बुरा असर पड़ सकता है।
इसलिए युवाओं में बढ़ती नशे की लत को केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं समझना चाहिए।
यह परिवार और समाज से जुड़ी एक गंभीर समस्या है। इसका समाधान सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।
नशे की लत रोकने के लिए जागरूकता जरूरी
आज की पीढ़ी को नशे के चक्रव्यूह से बचाने के लिए जागरूकता और सही मार्गदर्शन जरूरी है।
अभिभावकों को अपने बच्चों के व्यवहार, दिनचर्या और गतिविधियों पर ध्यान देना चाहिए।
यदि किसी युवा में नशे की लत के संकेत दिखाई दें, तो उसे डांटने या अपमानित करने के बजाय समझाने का प्रयास करना चाहिए।
जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की मदद भी लेनी चाहिए।
सरकारी विभागों, स्वैच्छिक संस्थाओं और समाज के बुद्धिजीवियों को मिलकर नशे के दुष्परिणामों के बारे में जागरूकता फैलानी चाहिए।
साथ ही प्रतिबंधित नशीले पदार्थों का अवैध कारोबार करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के लिए भी प्रयास किए जाने चाहिए।
सामूहिक प्रयासों से बनेगा नशामुक्त समाज
नशे की समस्या पर नियंत्रण पाने के लिए जागरूकता अभियान को गंभीरता से चलाना जरूरी है।
इसके लिए पर्याप्त संसाधनों, सामाजिक सहयोग और निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है।
यदि परिवार, समाज और प्रशासन मिलकर काम करें, तो युवाओं को नशे से दूर रखने में मदद मिल सकती है।
युवाओं को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और अपने भविष्य पर ध्यान देने के लिए प्रेरित करना होगा।
नशा मुक्त समाज का निर्माण तभी संभव है, जब हर व्यक्ति इस दिशा में अपनी जिम्मेदारी समझे और युवाओं को नशे से बचाने के लिए आगे आए।
