मुरादाबाद। प्राकृतिक खेती विषयक कृषि गोष्ठी का आयोजन मंगलवार को पंचायत भवन सभागार में कृषि विभाग की ओर से किया गया।
केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित प्राकृतिक खेती विषयक कृषि गोष्ठी में जनप्रतिनिधियों,
कृषि वैज्ञानिकों, कृषि विभाग के अधिकारियों और बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में प्राकृतिक खेती के लाभ, खेती की लागत कम करने और किसानों की आय बढ़ाने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।
प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरा शक्ति और किसानों की आय बढ़ाने पर दिया गया जोर
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए एमएलसी गोपाल अंजान ने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ती है।
इससे खेती की लागत कम होती है और उत्पादन की गुणवत्ता बेहतर होती है।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और मानव स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है।
किसानों से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग कम करने की अपील की गई।
सरकारी योजनाओं और आधुनिक कृषि तकनीकों की दी गई जानकारी
एमएलसी गोपाल अंजान ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार किसानों के हित में कई योजनाएं संचालित कर रही हैं।
कुंदरकी विधायक ठाकुर रामवीर सिंह ने कहा कि सरकार गांव,
गरीब और किसान के विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है।
उन्होंने किसानों से आधुनिक और प्राकृतिक कृषि तकनीकों को अपनाकर अपनी आय बढ़ाने का आह्वान किया।
विशेषज्ञों ने प्राकृतिक खेती की तकनीकों से कराया परिचित
उप कृषि निदेशक विकास सिंह ने प्राकृतिक खेती विषयक कृषि गोष्ठी में बताया कि प्राकृतिक खेती रासायनिक इनपुट पर निर्भरता कम करती है।
इससे खेती टिकाऊ और अधिक लाभकारी बनती है।
कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विभाग के विशेषज्ञों ने जैविक खेती, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण,
फसल अवशेष प्रबंधन और जैविक उर्वरकों के उपयोग की विस्तृत जानकारी दी।
जैविक उत्पाद बनाने का दिया गया प्रशिक्षण
कार्यक्रम में किसानों को जीवामृत, घनजीवामृत, बीजामृत और वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने की विधियां समझाई गईं।
प्राकृतिक खेती पर आधारित प्रदर्शनी भी लगाई गई। विशेषज्ञों ने किसानों के सवालों के जवाब दिए और उन्हें चरणबद्ध तरीके से प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।
जनप्रतिनिधि, अधिकारी और किसान रहे मौजूद
कार्यक्रम में भाजपा जिला अध्यक्ष आकाश पाल, महानगर अध्यक्ष गिरीश भांडुला, जिला कृषि अधिकारी डॉ. राजेंद्र पाल,
भूमि संरक्षण अधिकारी डॉ. योगेश कुमार सहित अन्य जनप्रतिनिधि, कृषि विभाग के अधिकारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
