मुरादाबाद में चिकित्सा क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि सामने आई है। कॉसमॉस हॉस्पिटल ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश का पहला सफल ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट किया है। यह सफलता मुरादाबाद के लिए एक नई शुरुआत है। अब मरीजों को बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
क्या है ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट?
ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट एक उन्नत चिकित्सा प्रक्रिया है। इसमें मरीज के अपने स्टेम सेल का उपयोग किया जाता है। पहले हाई-डोज कीमोथेरेपी दी जाती है।
फिर स्टेम सेल वापस शरीर में डाले जाते हैं। इससे नया बोन मैरो बनता है और शरीर मजबूत होता है।
किस बीमारी में होता है उपयोग?
यह उपचार खास तौर पर इन मरीजों के लिए उपयोगी है:
- कुछ प्रकार के लिंफोमा
- चयनित ब्लड कैंसर
डॉक्टरों के अनुसार, Multiple Myeloma Treatment Moradabad अब आसान हो गया है।
विशेषज्ञों ने क्या बताया?
कॉसमॉस हॉस्पिटल के क्लिनिकल हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. हिमांशु चतुर्वेदी के अनुसार: मल्टीपल मायलोमा एक गंभीर ब्लड कैंसर है। यह बोन मैरो को प्रभावित करता है।
इससे इम्यूनिटी कमजोर हो जाती है। हड्डियां कमजोर पड़ती हैं। संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
कितने समय में पूरा हुआ इलाज?
पूरी प्रक्रिया लगभग 2 से 3 सप्ताह में पूरी होती है। इस केस में मरीज का ट्रांसप्लांट करीब 10 दिनों में सफल हुआ। उपचार के दौरान कोई बड़ी जटिलता सामने नहीं आई।
अब मुरादाबाद में ही मिलेगा इलाज
पहले मरीजों को दिल्ली और मुंबई जाना पड़ता था। अब Bone Marrow Transplant Moradabad में ही संभव है।
यह उपलब्धि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करेगी। मरीजों का समय और खर्च दोनों बचेगा
समय पर जांच है जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है:
- छोटे लक्षणों को नजरअंदाज न करें।
- समय पर जांच कराएं।
- सही निदान से गंभीर बीमारी का इलाज संभव है।
निष्कर्ष
मुरादाबाद ऑटोलॉगस बोन मैरो ट्रांसप्लांट की यह सफलता पूरे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। कॉसमॉस हॉस्पिटल ने साबित किया है कि अब बड़े इलाज छोटे शहरों में भी संभव हैं।
