मुरादाबाद में मजलिस-ए-तहरीम मुरादाबाद के दौरान आयतुल्लाह खामनेई की शहादत को याद किया गया।
इस में इंकलाब का पैगाम गूंजा। कार्यक्रम में शिया सुन्नी एकता की मजबूत मिसाल देखने को मिली।
मौलाना रईस अहमद ने बयान की शहादत की अहमियत
मोहल्ला लकड़ी वाला स्थित जानी भाई के चौक पर मजलिस-ए-तहरीम मुरादाबाद का आयोजन किया गया। मजलिस को मौलाना रईस अहमद ने खिताब किया।
उन्होंने कहा कि आयतुल्लाह खामनेई की शहादत इंसानियत के लिए एक बड़ा संदेश है। शहीद कभी मरता नहीं। उसकी शहादत हर दौर में इंकलाब लाती है।
उन्होंने आगे कहा कि आयतुल्लाह खामनेई की शहादत ने उम्मत को जागरूक किया है और अब शिया सुन्नी एकता जरूरी है।
नोहाखानी और सीनाज़नी में उमड़ा जनसैलाब
मजलिस-ए-तहरीम के बाद नोहाखानी और सीनाज़नी की गई। अकीदतमंदों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। माहौल गमगीन रहा।
हर तरफ आयतुल्लाह खामनेई की शहादत का जिक्र होता रहा।
शिया-सुन्नी एकता ने दिया मजबूत संदेश
इस मजलिस-ए-तहरीम मुरादाबाद में शिया और सुन्नी दोनों समुदायों के लोग शामिल हुए।
शिया सुन्नी एकता का बेहतरीन उदाहरण देखने को मिला।
लोगों ने एकजुट होकर इंकलाब का पैगाम सुना।
शाहनवाज एडवोकेट की जानिब से आयोजन
इस कार्यक्रम का आयोजन शाहनवाज एडवोकेट की ओर से किया गया।
उन्होंने कहा कि आयतुल्लाह खामनेई की शहादत हमें एकता और भाईचारे का संदेश देती है।
